नवजागरण का दलित सन्दर्भ और केरल
भारतीय नवजागरण रतीय नवजागरण के विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते समय किसान, मज़दूर, सिपाही, स्त्री, बुद्धिजीवी, वैभवपूर्ण अतीत आदि सन्दर्भों की चर्चा तो ख़ूब हुई, पर क्या नवजागरण की निर्मितियों, मंतव्यों, गंतव्यों और उपलब्धियों के निर्माण में दलितों के प्रतिरोध भी उल्लेखनीय और विश्लेषणपूर्ण संदर्भों के क़ाबिल हैं? नवजागरण की निर्मितियों को रचने में भक्तिकाल की लोकधर्मी चेतना और पश्चिम से आई मानवतावादी चेतना की आधारभूत भूमिका रही है। इनका सिरा शोषित-पीड़ित श्रमशील दलित अवर्ण जातियों तथा स्त्रियों के संताप और उनके साहित्य से जुड़ता है। पश्चिमी परिदृश्य में अश्वेतों के संघर्ष से उपजे साहित्य से जुड़ता है।
शोध आलेख
प्रो. निरंजन सहाय
12/31/20201 min read


