मीरा की काव्यभाषा

मीरा की काव्यभाषा में अलंकार सज्जा, वाग्वैदग्ध्य और शास्त्रीय व्यंजना का प्रभाव है पर उनकी कविता का जादू वहाँ सर चढ़कर बोलता है, जहाँ भाषा दर्द के समंदर की तन्यमता और बेधकता को पारदर्शी रूप में प्रकट करती है। यही कारण है कि उनकी अभिधा की भाषा मारक प्रभाव उत्पन्न करती है।

प्रो. निरंजन सहाय

8/31/2009